नई दिल्ली (खबरगली) भारत में एक बार फिर निपाह वायरस ने चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण से एक महिला नर्स की मौत का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद राज्य का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर निगरानी की जा रही है, वहीं अस्पतालों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से जुड़ा माना जाता है, हालांकि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह संक्रमण में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर मामलों में दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसे लक्षण देखे जाते हैं। इसकी मृत्यु दर भी काफी अधिक मानी जाती है, जो इसे और खतरनाक बनाती है।
पश्चिम बंगाल में मामले सामने आने के बाद पड़ोसी देशों, खासकर म्यांमार सहित कई क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट और सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य जांच तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और आइसोलेशन ही संक्रमण रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
निपाह वायरस से बचाव के उपाय
1. संक्रमित व्यक्ति से दूरी – अगर किसी में तेज बुखार, उलझन या सांस की समस्या जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा जांच कराएं और दूरी बनाए रखें।
2. हाइजीन का ध्यान – नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं या सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।
3. कच्चे फलों से सावधानी – पेड़ों से गिरे या आधे खाए फलों का सेवन न करें, खासकर ऐसे फल जिन पर चमगादड़ों के संपर्क की आशंका हो।
4 जानवरों के संपर्क में सतर्कता – बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें और पशुपालन क्षेत्रों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
5 .मास्क और सुरक्षा किट – स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए।
फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई विशेष वैक्सीन या निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि घबराने की बजाय जागरूक रहें और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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