छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति: 'सेवा सेतु' पर मिलेंगी 570 सरकारी सेवाएं! जानें आम जनता को कैसे मिलेगा इसका फायदा

Chhattisgarh's digital revolution: 570 government services available on 'Seva Setu'! Learn how the public will benefit from it, Chief Minister Vishnu Dev Sai, Khabargali

रायपुर (खबरगली ) डिजिटल सुशासन की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'सेवा सेतु' (Sewa Setu) डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है, जिसने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब राज्य के नागरिकों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर 36 अलग-अलग विभागों की 570 नागरिक सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आइए जानते हैं कैसे यह पोर्टल छत्तीसगढ़ के करोड़ों लोगों का समय और पैसा बचा रहा है।

16,991 आधुनिक केंद्रों से बदला सुशासन का चेहरा

पहले जो केंद्र लोक सेवा केंद्र के रूप में जाने जाते थे, अब उन्हें आधुनिक रूप देकर 'सेवा सेतु केंद्र' बना दिया गया है। पूरे राज्य में 16,991 से अधिक आधुनिक केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दी जा रही हैं।

लाखों आवेदनों का त्वरित निस्तारण: इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 44 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनका समय सीमा के भीतर समाधान किया जा रहा है।

विशाल नेटवर्क: राज्य में 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1,000 से ज्यादा चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) इस व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं।

आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाना हुआ बेहद आसान

सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने, कागजात जमा करने और हफ्तों इंतजार करने का दौर अब खत्म हो चुका है। सेवा सेतु के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया गया है।

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कैसे काम करती है पूरी प्रक्रिया?

एक ही स्थान पर आवेदन: आवेदक अपने निकटतम सेवा सेतु केंद्र में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करता है।

ऑनलाइन प्रोसेसिंग: आवेदन सीधे संबंधित विभाग के पास डिजिटल रूप में पहुंच जाता है।

समयबद्ध सत्यापन: विभागीय सत्यापन के बाद निर्धारित समय-सीमा में प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से जारी कर दिया जाता है।

AI और 22 भारतीय भाषाओं का सपोर्ट: पोर्टल की मुख्य खासियतें

सेवा सेतु पोर्टल को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिलॉकर:

पोर्टल में AI तकनीक, डिजिलॉकर, ई-प्रमाण और उमंग जैसे प्लेटफॉर्म का सीधा इंटीग्रेशन किया गया है।

'भाषिणी' तकनीक से 22 भाषाएं: पोर्टल को 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे भाषाई रुकावटें खत्म हो गई हैं और ग्रामीण नागरिक भी इसे आसानी से समझ सकते हैं।

डिजिटल ट्रैकिंग और ऑनलाइन भुगतान: ई-चालान और ट्रेजरी सिस्टम से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा के साथ-साथ आवेदन की रीयल-टाइम ट्रैकिंग भी संभव है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम और ऑटोमेटिक पेनल्टी की व्यवस्था

प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए पोर्टल में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और शिकायत पंजीकरण की सुविधा दी गई है। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो प्रणाली में ऑटोमेटिक पेनल्टी का प्रावधान भी जोड़ा गया है। इस नई पहल से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि आम नागरिकों का सरकार और प्रशासनिक प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।