छत्तीसगढ़ में अब IPS संभालेंगे थानों की कमान, 125 अफसरों ने गोद लिए थाने

In Chhattisgarh, IPS officers will now take charge of police stations; 125 officers have adopted them. This is a major step taken following the instructions of the DGP-IGP conference. DGP Arundev Gautam has adopted the Ratanpur police station, Khabargali

DGP-IGP कॉन्फ्रेंस के निर्देश पर बड़ा कदम, DGP अरुणदेव गौतम ने रतनपुर थाना गोद लिया

रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग सुधार के लिए बड़ा अभियान शुरू हुआ है। प्रदेश के 125 से ज्यादा IPS और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को अलग-अलग थाने गोद दिए गए हैं। DGP अरुणदेव गौतम ने रतनपुर थाना गोद लिया है। अब अधिकारी खुद थानों का निरीक्षण कर पुलिसिंग सुधार की कार्ययोजना तैयार करेंगे।

IPS ने गोद लिए थाने, DGP संभालेंगे रतनपुर

  छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग को और मजबूत, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश के 125 से ज्यादा IPS और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों ने थाने गोद लिए हैं। इस पहल के तहत डीजीपी अरुणदेव गौतम ने रतनपुर थाना गोद लिया है।

कॉन्फ्रेंस के निर्देश पर एक्शन

पिछले साल नवा रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय DGP-IGP कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IPS और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को एक-एक थाना गोद लेकर वहां की पुलिसिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया था। अब छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है।

इन अफसरों को मिली थानों की जिम्मेदारी

इस अभियान के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें ADG SRP कल्लूरी कोतवाली बस्तर, प्रदीप गुप्ता तुमगांव महासमुंद, दीपांशु काबरा कोतवाली अंबिकापुर, अमित कुमार लालबाग राजनांदगांव, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला टिकरापारा और IG अमरेश मिश्रा हदबंद, बलौदाबाजार थाना शामिल हैं। IPS अधिकारियों के साथ-साथ राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को भी अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी दी गई है।

15 अगस्त के बाद थानों में पहुंचेंगे अफसर

गोद लिए गए थानों की स्थिति जानने के लिए संबंधित अधिकारी 15 अगस्त के बाद निरीक्षण करेंगे। वे थाना प्रभारी और स्टाफ के साथ बैठक कर स्थानीय समस्याओं की जानकारी लेंगे। इसके बाद थाने की जरूरत के हिसाब से सुधार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

DGP खुद रखेंगे हर थाने पर नजर

इस पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग DGP अरुणदेव गौतम करेंगे। अधिकारियों को अपने निरीक्षण, थाना स्टाफ के साथ बैठक, तैयार की गई कार्ययोजना और किए गए सुधारों का रिकॉर्ड रखना होगा। थाने में क्या बदला, क्या नया किया गया और पुलिसिंग कितनी बेहतर हुई—इसका रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होगा।

बीट पुलिसिंग बनेगी सबसे बड़ा फोकस

इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बीट पुलिसिंग को मजबूत करना है। पुलिस क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों, नए लोगों की आवाजाही और अपराधियों पर ज्यादा प्रभावी नजर रख सकेगी। इसके साथ ही पुलिस और आम जनता के बीच संवाद बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

स्मार्ट थाना, बेहतर रिकॉर्ड और लंबित केसों पर जोर

थानों में रिकॉर्ड के बेहतर संधारण, मालखानों के आधुनिकीकरण और लंबित मामलों के निपटारे को प्राथमिकता दी जाएगी। शिकायतों के समाधान और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी फोकस रहेगा। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण और सुधार अभियान के दौरान थाने की रोजमर्रा की पुलिसिंग प्रभावित न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

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