जांजगीर-चाम्पा(खबरगली) छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और साहित्य के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जांजगीर-चाम्पा जिले के निवासी रविन्द्र कुमार सोनी ने वह कर दिखाया है, जिसकी वर्षों से कल्पना की जा रही थी।
उन्होंने सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता का पहली बार छत्तीसगढ़ी भाषा में भावानुवाद कर उसका प्रकाशन कराया है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि पहली बार गीता का छत्तीसगढ़ी संस्करण प्रकाशित हुआ है।
25 वर्षों का मेहनत
करीब 25 वर्षों की लगातार मेहनत, अध्ययन, शोध और समर्पण के बाद रविन्द्र कुमार सोनी का यह सपना साकार हुआ है। उनके इस प्रयास को छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
राज्य गठन के साथ जन्मा था सपना
रविन्द्र कुमार सोनी बताते हैं कि जब वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तभी उनके मन में यह विचार आया कि प्रदेश की अपनी मातृभाषा में भी श्रीमद्भागवत गीता उपलब्ध होनी चाहिए। उनका मानना था कि यदि प्रदेश के लोग अपनी भाषा में गीता पढ़ेंगे, तो उसके संदेश को अधिक सहजता और आत्मीयता से समझ सकेंगे।
- Log in to post comments