रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल देखने को मिली है। महासमुंद कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचने पर कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया का पुष्पगुच्छ भेंट कर भावभीना एवं आत्मीय स्वागत किया। इस औपचारिक स्वागत के बाद एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले के दिव्यांग हितग्राहियों के स्वरोजगार और आर्थिक उत्थान की समीक्षा करना था।
दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
राज्य सरकार का मुख्य ध्येय समाज के हर वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से जिले में अनेक दिव्यांगों को अपना खुद का व्यवसाय (स्वरोजगार) शुरू करने के लिए आसान दरों पर ऋण (Loan) उपलब्ध कराया गया है। कलेक्ट्रेट में आयोजित इस विशेष बैठक के दौरान अब तक वितरित किए गए ऋणों की स्थिति, उससे दिव्यांगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और ऋण वसूली की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
ऋण वसूली अभियान को गति देने का मास्टर प्लान
बैठक का एक प्रमुख केंद्र ऋणों की समय पर वापसी सुनिश्चित करना रहा। समीक्षा के दौरान अध्यक्ष लोकेश कावड़िया और कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने अधिकारियों को निम्नलिखित मुख्य निर्देश दिए:
रिकवरी ड्राइव में तेजी: ऋण वसूली अभियान को और अधिक प्रभावी और गतिमान बनाया जाए ताकि बकाया राशि समय पर वापस आ सके।
रोटेशन चक्र की निरंतरता: समय पर ऋण वापसी से निगम के पास पुनः पर्याप्त फंड उपलब्ध होगा, जिससे चक्र निरंतर चलता रहे।
नए पात्र हितग्राहियों को अवसर: प्राप्त हुई राशि का उपयोग कतार में खड़े नए और पात्र दिव्यांगजनों को त्वरित ऋण देने के लिए किया जाएगा।
स्वरोजगार से ही संभव है आत्मनिर्भरता का सपना
"जब एक दिव्यांग व्यक्ति आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनता है, तो वह केवल अपना नहीं बल्कि पूरे परिवार का सहारा बनता है।" निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने स्पष्ट किया कि ऋण योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि दिव्यांग भाइयों-बहनों के भीतर आत्मविश्वास जगाना है। समय पर ऋण वसूली से अधिक से अधिक लोगों तक इस योजना का लाभ पहुँचाना संभव हो पाएगा।
भविष्य की रूपरेखा: महासमुंद में खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार
इस बैठक के बाद यह तय माना जा रहा है कि महासमुंद जिले में आने वाले दिनों में दिव्यांग कल्याण की योजनाओं में अभूतपूर्व तेजी आएगी। प्रशासन अब ऐसे पात्र दिव्यांगजनों की पहचान में जुटा है, जो छोटे-छोटे उद्योगों, दुकानों या हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका चलाने के इच्छुक हैं। निगम और जिला प्रशासन का यह संयुक्त प्रयास महासमुंद को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक रोल मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार है।
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