बाल विवाह के विरुद्ध छत्तीसगढ़ की 'हुंकार': बेटियों की 'आवाज' और स्थानीय बोलियां बन रहीं हथियार

Chhattisgarh ready to stop child marriage on Akshaya Tritiya, Dr. Varnika Sharma gave strict instructions, innovations like 'Bija Dutin' will stop the evil practice, Chhattisgarh's 'roar' against child marriage, daughters' 'voice' and local dialects are becoming weapons, Raipur, Khabargali

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने छत्तीसगढ़ मुस्तैद: डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिए कड़े निर्देश, 'बीजा दूतिन' जैसे नवाचारों से थमेगी कुरीति

रायपुर (खबरगली )आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कमर कस ली है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह के खिलाफ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलावार समीक्षा

आयोग कार्यालय में आयोजित एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में डॉ. शर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों से सीधे संवाद किया। बैठक में बाल विवाह रोकने हेतु अब तक की गई तैयारियों और जमीनी स्तर पर सक्रियता की विस्तृत समीक्षा की गई।

Chhattisgarh ready to stop child marriage on Akshaya Tritiya, Dr. Varnika Sharma gave strict instructions, innovations like 'Bija Dutin' will stop the evil practice, Chhattisgarh's 'roar' against child marriage, daughters' 'voice' and local dialects are becoming weapons, Raipur, Khabargali

प्रशासनिक सख्ती और मैदानी रणनीति

डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी जिलों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए: सक्रिय टीमें: जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमों का गठन कर उन्हें अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश।

मुनादी और सूचना: ग्रामीण और नगरीय निकायों में मुनादी के जरिए लोगों को कानूनी परिणामों से अवगत कराना।

नवाचारों पर जोर: 'मेरी आवाज सुनो' और 'बीजा दूतिन' जैसे स्थानीय नवाचारों के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाना।

दीवार लेखन और नाटक: नुक्कड़ नाटकों और दीवार लेखन के जरिए सामाजिक चेतना जगाने की रणनीति।

नवाचारों से मिशन को मिलेगी मजबूती

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मार्च और अप्रैल की शुरुआत से ही ग्राम पंचायतों और निकायों में बैठकों का दौर जारी है। स्थानीय प्रशासन 'बीजा दूतिन' जैसे पारंपरिक और प्रभावी माध्यमों का उपयोग कर रहा है ताकि संदेश घर-घर तक पहुँचे। आयोग की अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि अक्षय तृतीया पर होने वाले विवाहों पर कड़ी नजर रखी जाए और यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो त्वरित कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बैठक में सहायक संचालक श्रीमती संगीता बिन्द सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कांकेर की 'मेरी आवाज सुनो': बेटियों को मिला मंच

कांकेर जिले में ’मेरी आवाज सुनो’ कैंपेन एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस नवाचार के तहत 17-18 वर्ष की किशोरियां बेझिझक अपने मन की बात साझा कर रही हैं। यह मंच न केवल उनकी समस्याओं को सुनता है, बल्कि उनमें इतना आत्मविश्वास भर रहा है कि वे स्वयं अपने और समाज में हो रहे बाल विवाह के विरुद्ध खड़ी हो सकें।

बीजापुर की 'बीजा दूतिन' और सुकमा-जशपुर की भाषाई पहल

बीजापुर: यहाँ ’बीजा दूतिन’ के माध्यम से स्वयंसेवी किशोर-किशोरियां घर-घर जाकर जागरूकता फैला रहे हैं। वे बालिकाओं को बता रहे हैं कि यदि उन पर विवाह का दबाव बनाया जाए, तो उन्हें तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।

स्थानीयता का पुट: सुकमा में गोंडी और जशपुर में सादरी व कुरूख जैसी स्थानीय भाषाओं में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। डॉ. शर्मा ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय भाषा में दी गई जानकारी लोगों के दिलों तक जल्दी पहुंचती है।

बदलाव की बयार: सूरजपुर और जीपीएम जिले की सफलता

सूरजपुर: कभी बाल विवाह के मामलों में आगे रहने वाले इस जिले में अब प्रतिवर्ष केसों में क्रमिक कमी दर्ज की जा रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही (GPM): यहाँ की विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की एक बेटी ने मिसाल पेश की है। उसने स्वयं जागरूक होकर अपने विवाह की पूर्व सूचना प्रशासन को दी और खुद को इस कुरीति से बचाया।

सरल भाषा में समझाए जाएंगे नियम

बैठक के दौरान कुछ जिलों द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की बारीकियों को लेकर सुझाव दिए गए। इसे संज्ञान में लेते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने अधिनियम की धारा 16 (3) के तहत 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी' के कर्तव्यों को सरल और सुबोध भाषा में प्रसारित करने के निर्देश दिए, ताकि जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से समझ सकें।

स्थानीय भाषा और युवाओं का मिलेगा साथ

अध्यक्ष महोदया ने इस अभियान को 'जन-आंदोलन' बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने परामर्श दिया कि:

स्थानीय बोलियों का उपयोग: प्रचार-प्रसार के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए ताकि संदेश सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचे।

युवा शक्ति का सहयोग: गांव के स्वयंसेवी युवाओं को इस मुहिम से जोड़कर उन्हें जागरूक बनाया जाए।

1098 हेल्पलाइन का प्रचार: 'चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098' को जन-जन तक पहुंचाया जाए ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत दी जा सके।

सतत निगरानी पर जोर

सिर्फ कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि की गई शिकायतों और कार्यवाहियों का लगातार अनुवर्तन (Follow-up) करना भी अनिवार्य होगा। प्रशासन का लक्ष्य समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना है ताकि हर बच्चा सुरक्षित रहे और उसका बचपन शिक्षा व खेल-कूद में बीते, न कि विवाह के बंधनों में।

Category